वसीयत
वसीयत
वसीयत स्टांप या सादे कागज पर करवाई जा सकती है... दोनों की मान्यता बराबर है... विवाद ना हो इसलिए वसीयत का सब रजिस्ट्रार कार्यालय में वसीयत का रजिस्ट्रेशन करवा लेना चाहिए... ताकि भविष्य में आपके उत्तराधिकारियों को किसी भी तरह की समस्याओं में ना पड़ना पड़े...!
वसीयत कौन करवा सकता है...?
18 वर्ष से अधिक की आयु का कोई भी व्यक्ति अपनी वसीयत करवा सकता है... किसी भी धर्म का व्यक्ति अपनी वसीयत लिखकर रजिस्ट्रेशन करवा सकता है...!
वसीयत में किन किन बातों का ध्यान रखना चाहिए...?
वसीयत करते समय व्यक्ति अपने होशो हवास में हो... किसी भी प्रकार का नशा नहीं किया हुआ हो, किसी के दबाव में नहीं हो... और सबसे महत्वपूर्ण बात, व्यक्ति वसीयत में लिखी गई बातें ठीक ठीक समझता हो...!
वसीयत में किन बातों का उल्लेख होना चाहिए...?
वसीयत में चल-अचल सम्पत्ति, बैंक बैलेंस, नकदी, जेवरात, वाहन और चाहें तो घर के बरतनों का बंटवारा भी किस हिसाब से होना चाहिए, ये भी लिख सकते हैं. किसी के साथ पार्टनरशिप है तो अपने हिस्से की पार्टनरशिप, या अपने हिस्से की संपत्ति वसीयत की जा सकती है...!
सामान्य पेपर पर भी ये मान्य है, लेकिन स्टांप पर करवाना बेहतर रहेगा...!
वसीयत कब करवा लेनी चाहिए...?
सामान्यतः वसीयत 50 वर्ष की आयु के बाद करवा लेनी चाहिए... यदि आप सरकारी नौकरी करते हैं तो, रिटायरमेंट के तुरंत बाद आपको वसीयत करवा लेनी चाहिए... या फिर गंभीर बीमारी की अवस्था में कभी वसीयत करवा लेनी चाहिए...!
जिसके नाम वसीयत की जा रही है उसका पूरा नाम, उम्र, पता, उसके पिता का नाम, रिश्ता आदि , जिसके नाम वसीयत की जा रही है, वो नाबालिग है तो उसके गार्जियन का नाम और अपनी संपति का सम्पूर्ण विवरण...!
क्या वसीयत में बदलाव किया जा सकता है...?
वसीयत में जितनी बार चाहें उतनी बार बदलाव कर सकते हैं, बदलाव करते समय नई वसीयत में पुरानी वसीयत खोने या उस बदलाव का उल्लेख होना चाहिए और साथ ही ये भी उल्लेख होना चाहिए कि पुरानी वसीयत में लिखी गई सारी बातें रद्द की जाती हैं.
वसीयत का विवरण
वसीयत लिखे जाते समय एक बैलेंस शीट बना लेनी चाहिए, जिसमें आपकी पूरी संपति का विवरण होना चाहिए, कोई भी संपत्ति छूटनी नहीं चाहिए ताकि मृत्यु के बाद उस संपत्ति के लिए झगड़े नहीं हो... वसीयत में पूरा उल्लेख होना चाहिए कि आपकी कौनसी संपत्ति किसको मिलनी चाहिए, अगर कोई जमीन या मकान बहुत बड़ा है तो, उसका नक्शा बनवाकर उसमें सभी उत्तराधिकारियों के अलग अलग हिस्से करके उनमें नाम दर्ज कर देना चाहिए और उसमें रास्ते का भी विवरण होना चाहिए, रास्ते का विवरण नहीं होने की स्थित में भी झगड़े शुरू हो जाते हैं.
वसीयत में आपकी लेनदेन का विवरण भी होना चाहिए, आप पर किसका उधार है और आपने किसको क्या उधार दे रखा है...!
वसीयत में गवाह
वसीयत में दो गवाह होने चाहिए, दोनों गवाह आपके विश्वास पात्र होने चाहिए ताकि मरने से पहले ज्यादा प्रचार नहीं करें, बेहतर तो ये होगा कि एक डॉक्टर और एक वकील होने चाहिए...! दोनों गवाह उम्र में आपसे कम आयु के होने चाहिए...! वसीयत बनाने के बाद भी संपत्ति में आमदनी होती रहती है तो उसका कितना हिस्सा किसको जाएगा इसका भी विवरण वसीयत में देना चाहिए...! गवाह नजदीकी रिश्तेदार यानी खून के रिश्ते के नहीं होने चाहिए...!
वसीयत नही होने की स्थिति में
हिंदू है तो उसपर हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम लागू होगा, मुस्लिम है तो उसपर मुस्लिम पर्सनल लॉ लागू होगा और बंटवारा शरीयत के कानून के अनुसार होगा...!
मरने वाला किसी भी धर्म को मानने वाला नहीं है तो उसपर भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम लागू होगा...!
सबसे ज्यादा ध्यान रखने योग्य बात ये है कि, आपको वसीयत उसी हालत में लिखनी चाहिए जब आपके पास लिखने लायक कुछ हो...! वरना फालतू में जग हंसाई होगी, मरने के बाद...!
ये थी वसीयत से संबंधित कुछ बातें, जो वसीयत बनाते समय आपको ध्यान में रखनी चाहिए...! आपको ये ब्लॉग कैसा लगा, कमेंट करके जरूर बताइए...! अच्छा लगे तो आगे शेयर भी कीजिए...!


बहुत ही सार्थक जानकारी
जवाब देंहटाएंधन्यवाद
🙏🏻👍🏿
जवाब देंहटाएं