किरायेदार से अपनी दुकान या अपना मकान कैसे खाली करवा सकते हैं...?
एक परिवार या व्यक्ति के लिए आजीविका जीवन का आधार होती है... आजीविका का अर्थ है... आय का श्रोत, जहां से आपके घर में धन आता है, जिससे आप अपने परिवार का भरण पोषण करते हैं... ये सरकारी नौकरी या खुद का व्यवसाय हो सकता है... कोई बेरोजगार होता है या आजीविका का स्थाई साधन नहीं होता, ऐसी स्थिति में धन की आवश्यकता रहती है, लेकिन आजीविका स्थाई नहीं होती... तब हमारे पास अपनी संपति होती है... जिसे या तो हम बेच सकते हैं या फिर उसे रेंट यानी किराए पर दे सकते हैं... किराए पर देने का विकल्प सबसे बेहतर होता है... इसमें किसी जरूरतमंद को रहने के लिए घर मिल सकता है या आपके पास कोई दुकान है तो अपनी दुकान चला सकता है... उसकी रहने या व्यवसाय की आवश्यकता पूरी हो जाती है, और उसके माध्यम से आपको धन की...
लेकिन कई बार ऐसा होता है कि हम अपना घर या दुकान विश्वास करके किराए पर दे तो देते हैं लेकिन उस संपति को हमारे जरूरत पड़ने पर किरायेदार खाली करनें से मना कर देता है... या फिर दुर्व्यवहार करने पर उतारू हो जाता है... ऐसे में हम उस संपत्ति को खाली कैसे करवा सकते हैं...?
इसमें आपको दो बातें ध्यान में रखनी चाहिए:-
- रेंट एग्रीमेंट (किरायानामा) बनवाया हो
- रेंट एग्रीमेंट नही बनवाया हो
अगर आपने अपनी संपत्ति किसी को किराए पर दी है और ठीक तरीके से किरायानामा बनवाया है तो आपकी संपत्ति से कब्जा कोर्ट छुड़वाएगा... यानी किरायानामा बनवाने की स्थिति में ये कोर्ट की जिम्मेदारी है कि वो आपकी संपत्ति छुड़वाए...! दूसरी बात ये है कि आपकी संपत्ति पर आपके या आपके परिवार के रहते कोई कब्जा नहीं कर सकता... आपके पास उस संपत्ति के वैध कागजात हो...!
रेंट एग्रीमेंट नहीं बनवाने की स्थिति में, आपने भरोसा करके किसी रिश्तेदार, दोस्त या किसी अन्य को अपनी दुकान या मकान किराए पर दे दिया है और जब आपको उस संपत्ति के उपयोग की जरूरत हो और किरायेदार खाली करने से मना कर रहा हो तो आप इस मामले में कोर्ट जा सकते हैं या आपके पास उस जमीन के कागजात हैं तो आप अपने स्तर पर भी खाली करवा सकते हैं, ऐसी स्थिति में आप बल प्रयोग भी कर सकते हैं... आपके ऊपर कोई कार्यवाही नहीं होगी...! बस, आपके पास अपनी संपत्ति के संपूर्ण कागजात होने चाहिए...!
आप अपना मकान या दुकान या फिर कोई भी संपति किसी को किराए पर दे रहे हैं तो आपको संबंधित व्यक्ति के विषय में कुछ जानकारियां ले लेनी चाहिए... और एग्रीमेंट में नीचे लिखी बातें जरूर होनी चाहिए, ताकि आप किसी परेशानी में ना पड़ें:-
- पुलिस सत्यापन.
- किरायेदार पहले जहां रहता था, वहां उसके व्यवहार के बारे में पता कर लेना चाहिए.
- एग्रीमेंट की समय सीमा 11 महीने की ही होनी चाहिए.
- एग्रीमेंट पर संपति के मालिक और किरायेदार दोनों के सिग्नेचर होने चाहिए.
- एग्रीमेंट का पक्का रजिस्ट्रेशन.
- एग्रीमेंट 100 रुपए या उससे अधिक के स्टांप पर ही बनवाएं.
- रेंट एग्रीमेंट में दिनांक दर्ज करवाएं.
- स्टांप पेपर पर किरायेदार और मकान मालिक के सिग्नेचर होने चाहिए.
- एग्रीमेंट पर दोनों का एड्रेस लिखा हुआ होना चाहिए.
- आप किरायेदार को अन्य क्या क्या सुविधाएं दे रहे हैं, उनका उल्लेख भी होना चाहिए.
- आप अगर किराया बढ़ाने वाले हैं, तो कितने समय बाद बढ़ाएंगे, इसका भी उल्लेख होना चाहिए.
- आप किस तारीख से अपनी संपत्ति रेंट पर दे रहे हैं, इसका उल्लेख होना चाहिए.
आप किन परिस्थितियों में मकान खाली करवा सकते हैं:-
- जब खुद मालिक को उस संपत्ति के उपयोग की आवश्यकता हो.
- जब उस संपत्ति का ठीक तरह से रखरखाव नहीं हो रहा हो.
- संपति पर मालिक की बिना मर्जी के कोई निर्माण हो रहा हो.
- जब संपति को किरायेदार द्वारा कोई नुकसान पहुंचाया गया हो.
- यदि मकान या दुकान जर्जर अवस्था में है और निगम द्वारा नोटिस दिया गया हो.
- संपति का मालिक बीमार है या अपंग हो गया है.
- यदि किरायेदार ने 4 महीने या ज्यादा समय से किराया नहीं दिया हो.
- जिस उद्देश्य के लिए मकान या दुकान किराए पर दी गई है, उसके विपरीत या गैरकानूनी गतिविधियां की जा रही है.
इसके अलावा मकान मालिक को ये बात ध्यान में रखनी चाहिए कि आप किरायेदार का लाइट या पानी का कनेक्शन नहीं काट सकते...!
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