सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

कोरोना से सूंघने की शक्ति जाने के बाद वापस कैसे लाया जा सकता है...?

 COVID-19 होने पर सूंघने की शक्ति जाने के बाद, उसे वापस कैसे लाया जा सकता है...?












 कोविड नाईनटीन या कोरोना, मानव इतिहास के पूरे दो वर्ष खा चुका है... 2020 और 2021... एक आम धारणा है कि ये बीमारी चीन ने विकसित की और बाकी दुनिया पर डिप्लॉय कर दी... इस धारणा को इससे भी बल मिलता है कि जब बाकी दुनियां में कोरोना तांडव मचा रहा है और चीन अपनी सरपट दौड़ती जिंदगी जी रहा है, जैसे कुछ हुआ ही नहीं है... ना चीन ने कोई वैक्सीन बनाने की घोषणा की, ना बीमारी से छुटकारा पाने की... फिर कैसे ये महामारी चीन में बेअसर हो गई है...? इस सवाल पर सब चुपी साधे हुए हैं... 
द वीकेंड ऑस्ट्रेलियन की चीन से प्राप्त एक गुप्त दस्तावेज के हवाले से छापी गई रिपोर्ट के अनुसार चीन ये वायरस तीसरे विश्व युद्ध को ध्यान में रखते हुए विकसित कर रहा था... इस वायरस का आधार 2015 में आया सारस वायरस है, इस रिपोर्ट में ये भी दावा किया गया है कि चीन ने ये वायरस एक हथियार के तौर पर इस्तेमाल करने के लिए विकसित किया था... लेकिन गलती से ये वायरस समय से पहले ही प्रयोगशाला से बाहर आ गया... और इसका पता चल गया, वरना तबाही का मंजर और अधिक भयंकर होता... द वीकेंड ऑस्ट्रेलियन की रिपोर्ट की पुष्टि जापानी वैज्ञानिक और नोबेल पुरस्कार प्राप्त तोशुको होंजो के बयान से भी होती है... तोशुको होंजो ने कहते हैं,  मैं चीन की उस लैब में काम कर चुका हूं, मैं उस लैब के पूरे स्टाफ को व्यक्तिगत तौर पर जानता हूं, मेरे पास सबके मोबाइल नंबर भी है, समय समय पर बात भी होती रहती है, लेकिन पिछले काफी समय से उन सबके मोबाइल स्विच ऑफ आ रहे हैं... उनमें से कई लोगों ने प्रयोगशाला में कुछ गलत होने की बात भी बताई थी, वो गलत क्या था, आप समझ सकते हैं...!

ये तो हो गई वायरस के जन्म की बात... अब इसके सबसे बड़े साइड इफेक्ट इंसान के सूंघने की शक्ति चले जाना और उसे वापस कैसे लाया जा सकता है, उसपर बात करते हैं...

स्वाद और गंध 

कोरोना बीमारी से ठीक होने के बाद भी कई लोगों को कई दिनों तक स्वाद और गंध आंशिक या पूर्ण रूप से नहीं आती... आती भी है तो बिल्कुल कम... स्वाद में आप खट्टा या मीठा तो थोड़ा बहुत महसूस कर सकते हैं, लेकिन बाकी स्वाद का आपको पता नहीं चलता... और गंध तो लगभग आती ही नहीं है... अमेरिकी विशेषज्ञों की एक रिसर्च के अनुसार गंध की समस्या तो 9 महीने तक भी रह सकती है... 

     इस समस्या से निपटा कैसे जा सकता है... इन्फेक्शन की हालत में वायरस नाक में गंध लेने वाली कोशिकाओं को नष्ट कर देता है... जिसे स्वाद और गंध दोनो चले जाते हैं...! सामान्यतया ये कोशिकाएं कुछ समय बाद फिर विकसित हो जाती हैं, लेकिन कुछ मरीजों में ये समस्या लंबे समय तक बनी रहती है... गंध में गड़बड़ी का पता लगाना मुश्किल है, खुशबू  सुगंध के अलग अलग मॉलिक्यूल से पैदा होती है... और प्रत्येक मॉलिक्यूल के लिए अलग रिसेप्टर होता है, जो उसे उचित सुगंध देता है... जब कोरोना वायरस के कारण सूंघने वाली कोशिकाएं खत्म हो जाती हैं, तो सुगंध वाले मॉलिक्यूल को  उनका रिसेप्टर नहीं मिलता... इस तरह दिमाग तक सुगंध का पूरा प्रभाव पहुंच नही पाता और सुगंध का पता नही चल पाता...
इस वायरस से किसी अच्छी सुगंध की जगह किसी गैस या किसी अजीब खुशबू का एहसास होता है... जववारों पर किए गए शोध में ये बात सामने आई है कि वायरस तंत्रिका तंत्र से होते हुए दिमाग तक चला जाता है... दिमाग में जाकर ये वायरस गंध देने वाले इंपल्स को नष्ट कर देता है... 

अब रास्ता बचता है... ट्रेनिंग...  सूंघने की शक्ति को ट्रेनिंग से वापस पाया जा सकता है... इसके लिए पेसेंट्स को अलग अलग तरह के परफ्यूम सूंघने के लिए दिए जाते हैं... इसे पैसेंट्स सूंघते हैं और पहचानने की कोशिश करते हैं... इन परफ्यूम को सुबह शाम दो बार सुंघाया जाता है... दस से पंद्रह सेकंड्स के लिए... ये परफ्यूम गुलाब, उकेलिपटस, नींबू और लोंग की गंध वाले होते हैं... आप इन्हें सीधे तौर पर भी सूंघ सकते हैं... आप तेज गंध वाले मसाले या तेज गंध वाले तेल भी सूंघ सकते हैं... सबसे महत्वपूर्ण, सुगंध को महसूस करना है... उसे जानना नहीं... इस ट्रेनिंग में यही होता है, यानी सुगंध को महसूस करना... इसे आपके दिमाग में नए सर्किट बनेंगे और आप धीरे धीरे खुशबू महसूस कर पाएंगे...! 

आपको हमारा ये ब्लॉग कैसा लगा, कमेंट बॉक्स जरूर बताइए... आप कोरोना से संबंधित अपने एक्सपीरियंस भी बताइए...!

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

किरायेदार से अपनी दुकान या अपना मकान कैसे खाली करवा सकते हैं...?

किरायेदार से अपनी दुकान या अपना मकान कैसे खाली करवा सकते हैं...?        एक परिवार या व्यक्ति के लिए आजीविका जीवन का आधार होती है... आजीविका का अर्थ है... आय का श्रोत, जहां से आपके घर में धन आता है, जिससे आप अपने परिवार का भरण पोषण करते हैं... ये सरकारी नौकरी या खुद का व्यवसाय हो सकता है... कोई बेरोजगार होता है या आजीविका का स्थाई साधन नहीं होता, ऐसी स्थिति में धन की आवश्यकता रहती है, लेकिन आजीविका स्थाई नहीं होती... तब हमारे पास अपनी संपति होती है... जिसे या तो हम बेच सकते हैं या फिर उसे रेंट यानी किराए पर दे सकते हैं... किराए पर देने का विकल्प सबसे बेहतर होता है... इसमें किसी जरूरतमंद को रहने के लिए घर मिल सकता है या आपके पास कोई दुकान है तो अपनी दुकान चला सकता है... उसकी रहने या व्यवसाय की आवश्यकता पूरी हो जाती है, और उसके माध्यम से आपको धन  की...  लेकिन कई बार ऐसा होता है कि हम अपना घर या दुकान विश्वास करके किराए पर दे तो देते हैं लेकिन उस संपति को हमारे जरूरत पड़ने पर किरायेदार खाली करनें से मना कर देता है... या फिर दुर्व्यवहार करने पर उतारू हो जाता है....

भारत में कितने प्रकार के लॉ या कानून है.

 भारत में कितने प्रकार के लॉ या कानून है.     भारत की न्याय व्यवस्था विश्व की सबसे अलग और अनूठी न्याय व्यवस्था है, भारत की न्याय व्यवस्था का ध्येय है कि भले ही 100 अपराधी बच जाए लेकिन 1 भी निर्दोष फंसने ना पाए... शायद इसी वजह से भारत की न्याय व्यवस्था इतनी लचर और ढुलमुल दिखती है...  न्याय प्रणाली में अलग अलग कानूनों की अपनी शब्दावली है जो किसी को भी भुलभुलैया सी लगती है... जैसे आईपीसी, सीआरपीसी, एक्ट या सेक्शन... ये आर्टिकल इनके बारे में ही है...  एक्ट या अधिनियम एक्ट या अधिनियम, लोकसभा और राज्यसभा में पास हो जाता है और बाद में राष्ट्रपति की अनुमति मिल जाती है तो वो एक्ट या अधिनियम कहलाता है... जैसे CAA या कृषि बिल...! कोड या संहिता कोड या हिन्दी में संहिता, ये पहले से बना हुआ होता है, ऐसा लॉ सिस्टम जिसे संगठित करके वापस कानून बना दिया जाता है, उसे कोड कहते हैं... जैसे इंडियन पीनल कोड या भारतीय दण्ड संहिता और मोरल कोड ऑफ कंडक्ट या आचार संहिता. आर्टिकल या अनुच्छेद भारत का संविधान अलग अलग भागों में विभाजित किया गया है, ताकि कोई भी कानून ढूंढने में परेशानी ना हो......

गूगल पर क्या क्या सर्च नहीं करना चाहिए...?

गूगल पर क्या क्या चीजें सर्च नहीं करनी चाहिए...?   किसी जमाने में लोगों के पास कोई यक्ष, जिन्न, या प्रेत होता था, लोग उससे अपनी किसी भी बात का उत्तर जान लेते थे... आज हमारे पास गूगल है, मतलब आधुनिक और नया जिन्न...! हम अपनी जेब में लेकर घूमते हैं इसे.. अगर ये यक्ष हमारे पास से एक घंटे के लिए भी दूर हो जाए तो जिंदगी की कल्पना करना भी मुश्किल हो जाता है... कहीं का समाचार प्राप्त करना हो तो एक उंगली रगड़ी और सबकुछ आपकी आपकी आंखों के सामने... कोई गाना सुनना हो तो एक सेकंड में हाजिर... कोई फिल्म देखनी हो तो अगले ही क्षण आपके सामने... मतलब कुछ भी चाहिए तो गूगल महाशय है ना... गूगल ने जिंदगी आसान बना दी है हमारी... लेकिन... इसके नुकसान भी बहुत है... ये जिन्न साहब आपके जी का जंजाल बन सकते हैं, अगर इन्हें ठीक से ऑपरेट नहीं करें तो... आपकी सारी जानकारी एक पल में चोरों को सौंप देंगे ये... इसलिए इनसे कुछ भी पूछने से पहले आप थोड़ा सावधान रहिए...