संपति पर अवैध कब्जा हो जाने पर कैसे खाली करवाएं...?
समस्याएंं जीवन का हिस्सा हैं, आती रहती है... एक समस्या का निदान हुआ नहीं कि दूसरी समस्या उपस्थित हो जाती है... दूसरे शब्दों में कहा जाए तो जिंदगी का दूसरा नाम ही समस्या है... व्यक्ति अपने अनुभवों से ही सीखता है... ज्यादा अनुभवी व्यक्ति के पास ज्यादा समस्याओं का समाधान होता है... जैसे जैसे व्यक्ति की आयु बढ़ती है, वैसे ही उसे जीवन का अधिक अनुभव होता जाता है... ज्यादा उम्रदराज व्यक्ति मतलब ज्यादा समझदार और अनुभव... अनुभव ही व्यक्ति की जीवन भर की संपति होती है... व्यक्ति के पास संपति है लेकिन अनुभव नहीं है तो संपति ज्यादा समय तक नहीं टिकेगी...!
शायद हम अपने से उम्र में बड़े या बुजुर्गों का इसी लिए सम्मान करते हैं, क्योंकि उनके पास हमसे ज्यादा अनुभव है, वे हमसे ज्यादा समझदार हैं... वो किसी भी समस्या का हमसे जल्दी समाधान निकाल सकते हैं, उनकी किसी सलाह से जीवन की बड़ी से बड़ी समस्या का समाधान हो सकता है...! अपने से अनुभवी व्यक्ति का हमेशा सम्मान करना चाहिए, ताकि हम उनके सानिध्य में रहकर उनके अनुभव से सीख सकें...!
हम अगर सब कुछ खुद के अनुभव से ही सीखने लगे तो उसे समस्याओं के समाधान करने में बहुत लंबा वक्त लग सकता है... अपने अनुभव या एक्सपीरियंस के साथ साथ दूसरों के अनुभव से भी हमें सीखते रहना चाहिए... ताकि हम किसी परेशानी में पड़ने पर जल्दी निकल पाएं...!
वैसे तो जीवन में समस्याओं का कोई माप नहीं है, लेकिन एक बहुत बड़ी समस्या आम है... आपकी संपति पर अवैध कब्जा...!
अब कोई आपकी संपति या पैतृक संपत्ति पर बिना आपकी मर्जी के कब्जा करके बैठ जाए तो हम दुविधा में पड़ जाते हैं कि इसका समाधान कैसे किया जाए...!
समाधान
संपति पर अवैध कब्जे की स्थिति में हमें दो बातें ध्यान में रखनी चाहिए-
- संपति आपके नाम हो तब
- संपति आपके नाम नहीं हो, तब...
संपति आपके नाम नहीं हो इन मामलों में Specific Relief Act 1963 का Section 6 आपकी सहायता करता है... ऐसे मामले वे होते हैं, जैसे किसी ने सरकारी संपति पर कब्जा कर लिया हो या सार्वजनिक संपति पर कब्जा कर लिया हो या फिर किसी समाज के धन से खरीदी गई संपत्ति... ऐसे मामले में कब्जा करने के 6 महीने के अंदर अंदर आपको परिवाद दाखिल करना होता है...!
इस मामले में एक कंडीशन है कि सुनवाई में आप कब्जा छुड़वाने में असफल रहते हैं, मतलब फैसला आपके खिलाफ आ जाता है तो वही फैसला अंतिम होगा... आप उस फैसले में न तो रिव्यू करवा सकते हैं और ना ही आप ऊपर के किसी भी कोर्ट में अपील नहीं कर सकते... यानी आप हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट नहीं जा सकते... वही फैसला अंतिम होगा...!
जब संपति आपके नाम हो तब आपकेे उसका क्या उपचार या उपाय हो सकता है:-
Specific Relief Act. 1963 का सेक्शन 5
इस एक्ट के तहत आप सेशन कोर्ट में अपना परिवाद या सामान्य भाषा में कहें तो मुकदमा दायर करवा सकते हैं... इस मामले की ट्रायल में फैसला आपके खिलाफ आता है, तो आप हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक जा सकते हैं...! इस मामले में सबसे पहले आपको अपनी संपत्ति पर एक स्टे लेना चाहिए ताकि जिसने अवैध कब्जा कर रखा है, वो कोई निर्माण ना कर सके या आपकी संपति को आगे किसी को बेच नहीं सके...!
पुनाराम वर्सेज मोतीराम
2019 में सुप्रीम कोर्ट ने संपति विवाद में मामलों में एक ऐतिहासिक निर्णय दिया था, जो संपति विवाद मामलों में एक मील का पत्थर साबित हुआ है... इस फैसले में सुप्रीम कोर्ट की दो जजों वाली बेंच ने ये फैसला दिया था कि अगर संपत्ति आपके नाम है तो आपको कोर्ट जाने की जरूरत नहीं है, आप अपनी संपत्ति पर से कब्जा बलपूर्वक हटा सकते हैं... चाहे कब्जा 12 साल से अधिक समय से क्यों न किया गया हो... इसमें स्पेसिफिक एक्ट 1963 का 12 साल के कब्जे वाली बात लागू नहीं होती... 12 साल कब्जे वाली थ्योरी उस केस में लागू होती है, जिसमें उस संपति का मालिक मौजूद नहीं हो... यानी 12 साल से अधिक समय से भी कब्जा क्यों ना हो, अगर उस संपति का मालिक जीवित है... तो ये कानून वहां कोई काम नहीं करेगा...! यहां इस निर्णय में ये भी कहा गया है कि आप अपनी संपत्ति से अवैध कब्जा हटाने के लिए बल प्रयोग कर सकते हैं... कोर्ट जाने की आवश्यकता नहीं है...! लेकिन संपत्ति आपके नाम नहीं है, तब आपको कोर्ट केस करना पड़ेगा...!
क्या था पुनाराम वर्सेज मोतीराम का मामला...?
पुनाराम बाड़मेर निवासी था, और पुनाराम ने जागीरदार खूम सिंह से वर्ष 1966 में कुछ जमीन यानी प्लॉट्स लिए थे, प्लॉट अलग अलग जगहों पर थे, प्लॉट खरीदन और सम्पूर्ण कागजी कार्यवाही के बाद जब पुनाराम उन प्लॉट्स पर कब्जा करने गया तो वहां पहले से ही कुछ प्लॉट्स पर मोतीराम का कब्जा था...जब पुनाराम ने वो प्लॉट्स जागीरदार खूम सिंह से खरीद लेने की बात कही और मोतीराम से उस प्लॉट का कब्जा छोड़ देने के लिए कहा तो मोतीराम ने कब्जा छोड़ने से मना कर दिया, और प्लॉट पर अपना दावा होने की बात कही... विवाद बढ़ा तो मामला सेशन कोर्ट में पेश किया गया... 1972 में सेशन कोर्ट ने फैसला पुनाराम के पक्ष में दिया, क्योंकि मोतीराम के पास जमीन से जुड़ा कोई भी कागज नही था. इस फैसले के बाद कोर्ट ने वो प्लॉट खाली करने का आदेश दिया था... मोतीराम ने इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी और 2006 में राजस्थान हाई कोर्ट ने सेशन कोट का फैसला पलट कर मोतीराम के पक्ष में दे दिया...
हाई कोर्ट के फैसले को पुनाराम ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे दी... 13 साल बाद यानी जनवरी 2019 में सुप्रीम कोर्ट की दो जजों वाली बेंच ने राजस्थान हाई कोर्ट का फैसला खारिज करते हुए निचली अदालत के फैसले को सही माना और अपना फैसला पुनाराम के पक्ष मे दिया... जो संपत्ति विवाद के मामलों में मील का पत्थर साबित हुआ है... इस फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अगर कोई संपत्ति किसी के नाम है और उसका वास्तविक मालिक है तो वो कब्जा 12 सालों से ज्यादा समय से ही क्यों न हो अवैध है और उस संपत्ति का मालिक ही वास्तविक मालिक है, मोतीराम के वकील K.V. भारती उपाध्याय ने लिमिटेशन एक्ट 1963 सेक्शन 64 का हवाला देते हुए दलील दी कि अगर अगर किसी व्यक्ति का किसी संपत्ति पर 12 साल से अधिक समय से कब्जा हैै, और इन 12 सालों में किसी ने कोई दावा या परिवाद दायर नहीं किया है... तो 12 साल बाद कोई परिवाद दायर नहीं किया जा सकता है...! सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि... 12 साल वाली थ्योरी उस संपति पर लागू होती है, जिसका कोई मालिक नहीं हो... उस जमीन पर नहीं जिसका मालिक मौजूद हो...!
इस फैसले में सुप्रीम ने कहा है कि संपत्ति का मालिक कब्जा करने वालों को बलपूर्वक यानी जबरदस्ती बाहर निकाल सकता है... वास्तविक मालिक को अपनी जमीन खाली करवाने के लिए कोर्ट जाने की जरूरत नहीं है... वो अपने स्तर पर बलपूर्वक अवैध कब्जा धारी को उस संपत्ति से बेदखल कर सकता है...!
यहां ये ध्यान देने योग्य बात है कि आप किरायेदार को बलपूर्वक अपनी संपत्ति से हटा नहीं सकते, इसके लिए आपको कोर्ट में केस करना होगा...!
कैसा लगा आपको हमारा ये ब्लॉग...? कमेंट करके बताइए और अच्छा लगे तो आगे शेयर कीजिए...!


टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें
कोई भी समस्या हो तो हमें बताएं