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मई, 2021 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

गन का लाइसेंस लेने का क्या प्रोसेस है ?

 गन का लाइसेंस लेने का क्या प्रोसेस है ?     आत्म रक्षा या खुद के परिवार और अपनी संपति की सुरक्षा का अधिकार सभी को है, आत्म रक्षा के लिए कानून भी व्यक्ति को हत्या तक के मामले में राहत देता है... व्यक्ति को अपनी संपत्ति अपने परिवार और स्वयं की सुरक्षा पर खतरा महसूस होता है, तब उसकी रक्षा प्रशासन या समाज करता है... लेकिन हर समय प्रशासन और समाज साथ नहीं रहते, उसके लिए व्यक्ति को खुद ही अपनी सुरक्षा करनी होती है... स्वयं, परिवार और संपति की सुरक्षा के लिए किसी हथियार की जरूरत होती है, लेकिन कोई भी धारदार हथियार या गन या किसी भी प्रकार का खतरनाक हथियार रखना कानून की नजर में जुर्म होता है... धारदार हथियार के अलावा प्रशासन गन रखने की अनुमति देता है, लेकिन उसके लिए हमें एक मजबूत कारण बताना पड़ता है... प्रशासन को बताना पड़ता है कि... हथियार की जरूरत क्यों है...?  तो आज के इस ब्लॉग में हम जानेंगे कि गन का लाइसेंस किस प्रकार प्राप्त किया जा सकता है...?  गन का लाइसेंस लेना मुश्किल जरूर है, लेकिन असंभव नहीं है...          जरूरी दस्तावेज पहचान पत्र (आ...

पॉवर ऑफ अटॉर्नी

 पॉवर ऑफ अटॉर्नी       कई बार हमें कुछ कामों की जरूरत पड़ती है और हम उन्हें कर पाने में सक्षम नहीं होते या अपना काम छोड़कर वह काम करना नहीं चाहते... या हम बीमार होते हैं और हमारे काम रुक जाते हैं तो... ऐसी स्थिति में हम अपने आप को असहाय महसूस करते हैं... ऐसा ही मामलों में काम आती है पावर ऑफ अटॉर्नी...  पावर ऑफ अटॉर्नी होती क्या है...? पावर ऑफ अटॉर्नी एक्ट 1882 के अनुसार एक ऐसा दस्तावेज होता है, जिसके जरिए कोई व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति को अपना लीगल प्रतिनिधि नियुक्त करता है...!  जो घोषित करता है वो प्रिंसिपल कहलाता है और जो जिसको घोषित किया जाता है उसे एजेंट कहा जाता है...! एजेंट प्रिंसिपल के स्थान पर ज्यूडिशियल, फाइनेंशियल और अन्य फैसले ले सकता है... प्रिंसिपल के स्थान पर कोई डीड आदि साइन कर सकता है... ये सब कानूनन वैध होते हैं...! एजेंट पावर ऑफ अटॉर्नी के दायरे से बाहर नहीं जा सकता, यानी किसी मामले में मनमानी नहीं कर सकता... अगर एजेंट की वजह से प्रिंसिपल को कोई नुकसान हो जाता है तो उसकी भरपाई एजेंट ही करेगा, ये भी प्रावधान है...!  पावर ऑफ अटॉर्नी कैसे...

स्टे ऑर्डर कैसे लिया जाता है ?

स्टे ऑर्डर कैसे लिया जाता है ?    जीवन की अधिकतर समस्याएं बिना जानकारी के होती हैं, किसी भी बात की ठीक ठाक जानकारी हमें परेशानी में पड़ने से रोक सकती है... हर बात खुद के अनुभव से सीखी नहीं जाती, कई जानकारियां ऐसी होती हैं, जिनको किसी अन्य के अनुभव से ही सीखा जाना चाहिए... खुद के अनुभव से हम कोई काम निपटा नहीं सकते... व्यक्ति को हमेशा कुछ न कुछ सीखते रहना चाहिए... कई शोध इस बात का दावा करते हैं कि हमेशा कुछ न कुछ नया करते रहने वाला व्यति ज्यादा उम्र पाता है... आज हम स्टे ऑर्डर पर जानकारी देंगे... जो भविष्य में आपके बहुत काम आ सकती है...! स्टे ऑर्डर होता क्या है...? जब कोई विरोधी पक्ष का व्यक्ति या पार्टी हमारे हितों के प्रतिकूल कोई कार्य करता है और उसको रोकने के लिए हमें प्रशासन की जरूरत होती है, प्रशासन का उस मामले में हस्तक्षेप सिविल कोर्ट के आदेश से ही संभव है... सिविल कोर्ट से उस कार्य को रूकवाने के लिए हमें कोर्ट के सामने एक एप्लीकेशन प्रस्तुत करनी होती है, जिसमें निवेदन करना होता कि विरोधी पक्ष हमारे हितों के विपरीत कार्य कर रहा है, जिसे रोकने के लिए स्टे ऑर्डर यानी निषेध...

चेक बाउंस होने पर क्या कर सकते हैं...?

चेक बाउंस होने पर क्या कर सकते हैं...?     आदमी को सबसे ज्यादा डर अगर किसी बात का है, तो वो है धोखा... मौत से अधिक डर व्यक्ति को धोखे से लगता है... धोखा मानसिक हो सकता है, आर्थिक मामले में हो सकता है... कई बार तो धोखा शारीरिक नुकसान भी पहुंचा देता है... इन सबसे बचने के लिए व्यक्ति को समाज के विषय में अपडेट रहना चाहिए...!  व्यक्ति को चाहिए कि अपने आस पास के माहौल को ठीक से समझ लें... ताकि आम जन की मानसिक स्थिति को लेकर कोई कोई कन्फ्यूजन नहीं रहे...!  आर्थिक मामलों में सबसे अधिक धोखे होते हैं, इनमें चेक से संबंधित धोखा सबसे ज्यादा होता है...! एक बार विश्वास करके चेक स्वीकार कर लिया जाए तो हम धोखा खाने से बच नहीं सकते हैं... हमें चेक लेते समय ये पता नहीं होता है कि चेक देने वाले के खाते में पैसे है भी या नहीं...? अगर चेक बाउंस हो जाए तो हमारे पास क्या क्या उपाय है, उसी पर हम आज जानेंगे...! चेक बाउंस होता कैसे है...? मान लीजिए आपको किसी ने किसी पेमेंट के बदले चेक काट कर दिया, आप उस चेक को बैंक में कैश करवाने या अपने खाते में पैसे डलवाने गए, जिसने चेक जारी किया है उसके खा...

उम्र कैद की सजा वास्तव में कितने साल की होती है...?

उम्र कैद की सजा वास्तव में कितने साल की होती है...?    जब कोई भ्रांति फैल जाती है तो वो बड़े व्यापक स्तर पर फैलती है... उसका जनमानस पर बहुत गहरा असर पड़ता है... गलत और तथ्यहीन बात बहुत जल्द फैल जाती है, ऐसे बातें लोगों को भावनात्मक रूप से प्रभावित करती है... फिर चाहे लाख कोशिश क्यों ना कर लीजिए... लोग गलत को ही सच मानेंगे...! ऐसी ही भ्रांति भारत में उम्रकैद की सजा को लेकर फैली हुई है... आम धारणा है कि उम्रकैद की सजा 14 साल ही होती है... जबकि ऐसा नहीं है..! मारू राम वर्सेज भारत सरकार के केस में सुप्रीम कोर्ट ने दोषियों के वकीलों की याचिका खारिज करते हुए कहा था कि उम्रकैद का मतलब मुजरिम को पूरी जिंदगी जेल में ही बितानी पड़ेगी... संविधान में कहीं नहीं लिखा है कि उम्रकैद की सजा 14 साल है... उम्रकैद का मतलब जीवन भर जेल में ही रहना होगा... मारूराम और उसके साथी 1981 से हत्या के मामले में जेल में बंद हैं, और उनके वकीलों ने उनकी जेल में बिताई गई 14 वर्ष की अवधि के बाद उनको रिहा करने के लिए एक याचिका दायर की थी जिसे सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया...! IPC के सेक्शन 45 में ये उल्लेख किया ...

दीवानी मुकदमा या सिविल केस कैसे किया जाता है...?

दीवानी मुकदमा या सिविल केस कैसे किया जाता है...?        काम करने के अपने अपने तरीके होते हैं, किसी भी काम को अगर ठीक तरीके से किया जाए तो, उस काम के सफल होने की संभावनाएं बढ़ जाती है, अगर ठीक प्रोसीजर से कोई काम किया जाए तो आधी समस्याएं तो वैसे ही सुलझ जातीं है...! कोर्ट के मामलों में काम अपनी एक प्रक्रिया से होता है... प्रक्रिया पर ही निर्भर है कि बात किस स्तर तक जा सकती है, प्रक्रिया अगर ठीक है तो आप बिना समस्याओं का सामना किए... अपनी मंजिल पा सकते हैं...!  आज हम सिविल केस यानी दीवानी मुकदमा दायर कैसे किया जाए, उसके विषय में जानेंगे...! Civil Case या दीवानी मुकदमा   ऐसी स्थिति में किया जाता है, जब हमारा उद्देश्य अपना अधिकार प्राप्त करने का हो, ऐसे मामलों में जेल नहीं होती... इनमें तलाकशुदा महिला को अपना गुजारा भत्ता प्राप्त करना हो, किसी पर मानहानि का मुकदमा करके हर्जाना लेना हो... आदि मामले आते हैं, इनका उद्देश्य जेल भिजवाना नहीं होता...  Civil Case या दीवानी मामलों में सबसे महत्वपूर्ण है, कोर्ट का प्रोसीजर फॉलो करना... प्रोसीजर का पाल...

वसीयत

वसीयत           भविष्य में आने वाली अधिकतर समस्याओं को हम अपनी सूझ बूझ से टाल सकते हैं... जिस परिवार में जितनी कम समस्या आयेगी... वो परिवार उतना ही अधिक उन्नति करेगा... समस्याओं से घिरा परिवार और उस परिवार के सदस्य कभी उन्नति नहीं कर सकते...!    समस्याओं से घिरा परिवार हमेशा सबसे पीछे ही रहता है... ना बच्चे पढ़ पाते हैं, ना उनको उचित संस्कार मिल पाते हैं... इस बात का हमेशा ध्यान रखना चाहिए कि आप समाज में चल रही समस्याओं को पर नजर रखे, उनका विश्लेषण करते रहें... और उस अनुभव के आधार पर आप अपने परिवार के भविष्य में आने वाली समस्याओं से बच सकते हैं... अगर आपका परिवार बहुत बड़ा है, तो समस्याएं भी ज्यादा आने वाली हैं...! ज्यादातर समस्याएं संपत्ति को लेकर होती हैं... संपत्ति का बंटवारा ठीक से नहीं हुआ है, तो समस्याओं का अंबार लग जाता है, इस समस्या से परिवार टूट जाता है... इसको टालने के लिए आपको अपनी संपत्ति को लेकर समय पर वसीयत तैयार करवा लेनी चाहिए...!  वसीयत वसीयत स्टांप या सादे कागज पर करवाई जा सकती है... दोनों की मान्यता बराबर है... विवाद ना हो इसलिए...

किरायेदार से अपनी दुकान या अपना मकान कैसे खाली करवा सकते हैं...?

किरायेदार से अपनी दुकान या अपना मकान कैसे खाली करवा सकते हैं...?        एक परिवार या व्यक्ति के लिए आजीविका जीवन का आधार होती है... आजीविका का अर्थ है... आय का श्रोत, जहां से आपके घर में धन आता है, जिससे आप अपने परिवार का भरण पोषण करते हैं... ये सरकारी नौकरी या खुद का व्यवसाय हो सकता है... कोई बेरोजगार होता है या आजीविका का स्थाई साधन नहीं होता, ऐसी स्थिति में धन की आवश्यकता रहती है, लेकिन आजीविका स्थाई नहीं होती... तब हमारे पास अपनी संपति होती है... जिसे या तो हम बेच सकते हैं या फिर उसे रेंट यानी किराए पर दे सकते हैं... किराए पर देने का विकल्प सबसे बेहतर होता है... इसमें किसी जरूरतमंद को रहने के लिए घर मिल सकता है या आपके पास कोई दुकान है तो अपनी दुकान चला सकता है... उसकी रहने या व्यवसाय की आवश्यकता पूरी हो जाती है, और उसके माध्यम से आपको धन  की...  लेकिन कई बार ऐसा होता है कि हम अपना घर या दुकान विश्वास करके किराए पर दे तो देते हैं लेकिन उस संपति को हमारे जरूरत पड़ने पर किरायेदार खाली करनें से मना कर देता है... या फिर दुर्व्यवहार करने पर उतारू हो जाता है....

संपति पर अवैध कब्जा हो जाने पर कैसे खाली करवाएं...?

संपति पर अवैध कब्जा हो जाने पर कैसे खाली करवाएं...?      समस्याएंं जीवन का हिस्सा हैं, आती रहती है... एक समस्या का निदान हुआ नहीं कि दूसरी समस्या उपस्थित हो जाती है... दूसरे शब्दों में कहा जाए तो जिंदगी का दूसरा नाम ही समस्या है... व्यक्ति अपने अनुभवों से ही सीखता है... ज्यादा अनुभवी व्यक्ति के पास ज्यादा समस्याओं का समाधान होता है... जैसे जैसे व्यक्ति की आयु बढ़ती है, वैसे ही उसे जीवन का अधिक अनुभव होता जाता है... ज्यादा उम्रदराज व्यक्ति मतलब ज्यादा समझदार और अनुभव... अनुभव ही व्यक्ति की जीवन भर की संपति होती है...  व्यक्ति के पास संपति है लेकिन अनुभव नहीं है तो संपति ज्यादा समय तक नहीं टिकेगी...! शायद हम अपने से उम्र में बड़े या बुजुर्गों का इसी लिए सम्मान करते हैं, क्योंकि उनके पास हमसे ज्यादा अनुभव है, वे हमसे ज्यादा समझदार हैं... वो किसी भी समस्या का हमसे जल्दी समाधान निकाल सकते हैं, उनकी किसी सलाह से जीवन की बड़ी से बड़ी समस्या का समाधान हो सकता है...! अपने से अनुभवी व्यक्ति का हमेशा सम्मान करना चाहिए, ताकि हम उनके सानिध्य में रहकर उनके अनुभव से सीख सकें...! हम...

झूठी FIR होने पर क्या करें ?

झूठी FIR होने पर क्या करें ?       कानून लोगों की भलाई के लिए बनाए गए हैं, ताकि लोग देश में शांति से जीवन यापन कर सकें, कोई उन्हें बेवजह परेशान ना करे... कानून के भय से लोग अपने दायरे में रहेंगे तो अव्यवस्था नही फैल पाएगी... कानून की पालना के लिए देश में एक पूरा सिस्टम बना हुआ है... सरकार से लेकर कोर्ट तक और कोर्ट से लेकर पुलिस तक... ताकि आमजन को किसी प्रकार की परेशानी नहीं हो... लेकिन कभी कभी लोग दुर्भावना से किसी के ऊपर कोई झूठा परिवाद यानी केस दर्ज करवा देते हैं... पुलिस और केस दर्ज करवाने वाले को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता, लेकिन जिसके ऊपर केस दर्ज होता है, उसकी पूरी जिंदगी खराब होने की संभावना होती है... केस में उलझने के बाद व्यक्ति ना काम कर पाता है और ना ही अपने घर को संभाल पाता है... इस तरह के झूठे परिवाद या केस से निपटारा पाने के लिए भी व्यवस्था की गई है... लेकिन हम जानकारी के अभाव में परेशान होते रहते हैं... झूठे केस या परिवाद या मुकदमे को किस तरह रद्द करवाया जा सकता है... आज उसी पर ये लेख है... झूठी एफआईआर या मुकदमा      पिछले लेख में बताया था कि क...

पुलिस FIR दर्ज नहीं करे, तो क्या करना चाहिए...?

 पुलिस FIR दर्ज नहीं करे, तो क्या करना चाहिए...? एफआईआर का हिन्दी में मतलब प्रथम सूचना प्रतिवेदन, एफआईआर किसी अपराध के घटित होने के बाद पुलिस थाने में दर्ज करवाई जाती है... एफआईआर का उल्लेख IPC की धारा 154, CrPC-1973 में किया गया है, इस धारा में ये उल्लेख किया गया है कि एफआईआर किसी भी नजदीकी थाने में दर्ज करवाई जा सकती है...जरूरी नहीं है कि जिस थाना क्षेत्र में अपराध हुआ हो उसी थाना क्षेत्र में एफआईआर दर्ज करवाई जाए... आप किसी भी थाने में प्राथमिकी या एफआईआर दर्ज करवा सकते हैं... संबंधित थाना क्षेत्र के अलावा किसी अन्य थाना क्षेत्र में दर्ज करवाई गई एफआईआर जीरो नंबर एफआईआर कहलाती है...!  पुलिस उस एफआईआर को नोट करेगी और उस पुलिस स्टेशन को भेज देगी, जिस थाना क्षेत्र में अपराध कारित हुआ है...! अपराध  केे दो प्रकारर होतेे हैं संज्ञेय अपराध या Cognizable Offence असंज्ञेय मामले या Non Cognizable Offence संज्ञेय अपराध यानी गंभीर अपराध, इनमें हत्या, बलात्कार, लूट आदि आते हैं...! असंज्ञेय अपराध यानी सामान्य अपराध जैसे संपति विवाद, अतिक्रमण, आपसी लेनदेन आदि...! CrPC 1973, के अनुस...

कब किसी की हत्या करना अपराध नहीं होता...?

कब किसी की हत्या करना अपराध नहीं होता...? भारत का कानून या कहें तो संविधान सबको बराबर अधिकार देता है... कानून का पालन करने वालों को भी और पालन करवाने वालों को भी... यानी जनता और पुलिस, दोनों के अपने अपने दायरे हैं... कोई भी अपना दायरा नही तोड़ सकता... अगर कोई अपने दायरे का उल्लंघन करता है तो, कानून की नजर में वो एक क्राइम है... लेकिन कभी कभी... पुलिस और आमजन कानून हाथ में लेने से नहीं चूकते... इसके लिए संविधान में क्या प्रावधान है... इन सबके बावजूद अपनी आत्मरक्षा करने का अधिकार सबको है... आत्मरक्षा में किया गया अपराध क्या सही है...? क्या आत्मरक्षा में पुलिस पर भी हाथ उठाया जा सकता है...? पुलिस को भी क्या आत्म रक्षा का अधिकार है...? उसी पर ये लेख है:- आप किसी को भी अपनी आत्मरक्षा में कितनी हानि पहुंचा सकते हैं...?     आत्मरक्षा में कोई भी काम नाप तौल कर नहीं किया जा सकता है, उस समय परिस्थितियां हमारे वश में नहीं होती... आत्म रक्षा में आपकी और आप पर हमला करने वाले दोनों को लगने वाली चोट का कोई अनुमान नहीं लगाया जा सकता... फिर भी अगर हमलावर के पास कोई हथियार या लाठी डंडा है, तो आ...

कोरोना से सूंघने की शक्ति जाने के बाद वापस कैसे लाया जा सकता है...?

  COVID-19 होने पर  सूंघने की शक्ति जाने के बाद, उसे वापस कैसे लाया जा सकता है...?  कोविड नाईनटीन या कोरोना, मानव इतिहास के पूरे दो वर्ष खा चुका है... 2020 और 2021... एक आम धारणा है कि ये बीमारी चीन ने विकसित की और बाकी दुनिया पर डिप्लॉय कर दी... इस धारणा को इससे भी बल मिलता है कि जब बाकी दुनियां में कोरोना तांडव मचा रहा है और चीन अपनी सरपट दौड़ती जिंदगी जी रहा है, जैसे कुछ हुआ ही नहीं है... ना चीन ने कोई वैक्सीन बनाने की घोषणा की, ना बीमारी से छुटकारा पाने की... फिर कैसे ये महामारी चीन में बेअसर हो गई है...? इस सवाल पर सब चुपी साधे हुए हैं...  द वीकेंड ऑस्ट्रेलियन की चीन से प्राप्त एक गुप्त दस्तावेज के हवाले से छापी गई रिपोर्ट के अनुसार चीन ये वायरस तीसरे विश्व युद्ध को ध्यान में रखते हुए विकसित कर रहा था... इस वायरस का आधार 2015 में आया सारस वायरस है, इस रिपोर्ट में ये भी दावा किया गया है कि चीन ने ये वायरस एक हथियार के तौर पर इस्तेमाल करने के लिए विकसित किया था... लेकिन गलती से ये वायरस समय से पहले ही प्रयोगशाला से बाहर आ गया... और इसका पता चल गया, वरना तबाही का म...

भारत भ्रमण

 भारत भ्रमण भ्रमण करना मनुष्य का स्वभाव है, मनुष्य एक जगह बैठकर नहीं रह सकता... शुरू से ही मनुष्य यात्राएं करते आया है... मनुष्य यात्राएं नहीं करता तो... ना सभ्यताओं का विकास होता और ना ही तकनीक का... एक जगह से दूसरी जगह जाने पर नई चीजें देखने को मिलती है... उन्हीं नई चीजों को देखकर मनुष्य का मस्तिष्क एक अलग प्रकार से काम करता है... जब यात्राएं होंगी तो इस दौरान समस्याएं भी आएगी... समस्याओं के समाधान खोजे जायेंगे... समाधान से तकनीक विकसित होगी... और तकनीक ही सबकुछ है, दुनियां में, आपके पास तकनीक है तो आप दुनियां को अपने हिसाब से जी सकते हैं,  भ्रमण करने से आदमी का दिल और दिमाग हल्का होता है, जब आदमी भ्रमण करने या घूमने निकलता है तो उसे बहुत सारी चीज़ें चाहिए होती हैं... उन चीजों की पूर्ति स्थानीय लोगों से ही होगी... रोजगार बढ़ेगा... सार ये है कि भ्रमण से ही ये दुनिया चल रही है... कई लोगों को विदेशों में भ्रमण करना पसंद है, कई लोग अपने ही देश में घूमने के शौकीन होते हैं... जब आप किसी विदेश में घूमने जायेंगे तो उसका फायदा उस देश को होगा... अप्रत्यक्ष तौर पर कहा जाए तो अपने देश क...

भारत में कितने प्रकार के लॉ या कानून है.

 भारत में कितने प्रकार के लॉ या कानून है.     भारत की न्याय व्यवस्था विश्व की सबसे अलग और अनूठी न्याय व्यवस्था है, भारत की न्याय व्यवस्था का ध्येय है कि भले ही 100 अपराधी बच जाए लेकिन 1 भी निर्दोष फंसने ना पाए... शायद इसी वजह से भारत की न्याय व्यवस्था इतनी लचर और ढुलमुल दिखती है...  न्याय प्रणाली में अलग अलग कानूनों की अपनी शब्दावली है जो किसी को भी भुलभुलैया सी लगती है... जैसे आईपीसी, सीआरपीसी, एक्ट या सेक्शन... ये आर्टिकल इनके बारे में ही है...  एक्ट या अधिनियम एक्ट या अधिनियम, लोकसभा और राज्यसभा में पास हो जाता है और बाद में राष्ट्रपति की अनुमति मिल जाती है तो वो एक्ट या अधिनियम कहलाता है... जैसे CAA या कृषि बिल...! कोड या संहिता कोड या हिन्दी में संहिता, ये पहले से बना हुआ होता है, ऐसा लॉ सिस्टम जिसे संगठित करके वापस कानून बना दिया जाता है, उसे कोड कहते हैं... जैसे इंडियन पीनल कोड या भारतीय दण्ड संहिता और मोरल कोड ऑफ कंडक्ट या आचार संहिता. आर्टिकल या अनुच्छेद भारत का संविधान अलग अलग भागों में विभाजित किया गया है, ताकि कोई भी कानून ढूंढने में परेशानी ना हो......

कानूनी अधिकार जो आपको पता होने चाहिए

 ऐसे कानून जो आपको पता होने चाहिए.                      अधिकार एक ऐसी चीज है जो सिर्फ मांगने पर ही मिल सकती है, माँगा तब जाता है जब हमें मालूम हो कि अमुक चीज हमारी है और उसपर हमारा हक़ है, बिना हक़ जताये कुछ भी नहीं मिलता, किसी अपनी पर चीज या अपने अधिकार जाताना जीवित मनुष्य की निशानी है,  याद रखिये कि रोये बिना मां भी दूध नहीं पिलाती, जो व्यक्ति अपने अधिकार को नहीं जानता उसका जीवित रहना या नहीं रहना कोई मायने नहीं रखता   हम एक स्वतंत्र देश में रहते हैं, हमारा देश विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, संविधान में लिखा है कि इस देश का संविधान जनता का, जनता के द्वारा और जनता के लिए है, मतलब ये कि इस देश में जो कुछ भी है जनता का है, मतलब हमारा है, और जानकारी के आभाव में हम परेशानियों में पड़ते रहते हैं, आज हम कुछ कानूनी अधिकारों के बारे में  बता रहे हैं, जो भविष्य में आपके लिए बहुत उपयोगी साबित हो सकते हैं...   गिरफ्तारी का कारण जानने का अधिकार :- जब पुलिस आपको गिरफ्तार करे तो आपको सीआरपीसी सेक्शन 50, सब सेक्शन 1 के ...