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वकीलों का कोट काला ही क्यों...?

वकीलों का कोट काला ही क्यों...?

 किसी भी व्यक्ति या संस्था या किसी खास जगह की अपनी एक पहचान होती है... पहचान आवाज की हो सकती है... पहचान किसी खास सुगंध की हो सकती है... पहचान रंग की हो सकती है... प्रत्येक चीज की अपनी एक पहचान होती है... यानी पहचान ही सब कुछ है... पालतू जानवर भी किसी खास वजह से लोगों या अपने मालिक को पहचानते हैं...! अपनी पहचान जिस किसी भी वजह से है उसे खोना नहीं चाहिए... पहचान खो जाने से सब कुछ खो जाता है... 
जैसे हम खाली रंग देखते ही समझ जाते हैं पुलिस है... या किसी को सफेद कोट में देखते हैं तो पहचान जाते हैं कि कोई डॉक्टर है... उसी प्रकार किसी को काले कोट में देखते ही पहचान जाते हैं कि कोई वकील है... तो आज हम इस बात को समझने की कोशिश करेंगे कि वकीलों के कोट का रंग काला ही क्यों होता है...

    काला रंग शक्ति और अधिकार को दर्शाता है, तथा भारतीय संस्कृति में काले रंग को न्याय के देवता शनि का रंग माना गया है, क्योंकि शनि का रंग भी काला है...!

इतिहास
     1685 में ब्रिटेन के राजा की मौत के बाद वहां के लोगों और वकीलों ने राजा की मृत्यु का दुःख प्रकट करने के लिए कोर्ट में काले रंग का कोट पहनकर आना शुरू किया जो धीरे धीरे वकीलों की पहचान बन गया... ये भी समझा जाता है कि काले रंग पर मेल जल्दी नहीं चढ़ता है जिससे मेल दिखाई नहीं देता... ये रंग अपने आप में अलग दिखता है, इसलिए वकीलों ने इसे अपने आप को अलग दिखाने के लिए पहनना शुरू किया...! 17 वीं सदी में ब्रिटेन के राजा चार्ल्स द्वितीय ने जजों और वकीलों को सफेद विग और काला कोट पहनकर कोट में आने के लिए नियम जारी किया, चार्ल्स द्वितीय को इसकी प्रेरणा फ्रांस की न्याय प्रणाली से मिली...!

    वकील काले रंग का कोट और सफेद रंग की टाई पहनते हैं, जिसका मतलब है, कि वे लोग अंधकार में से प्रकाश को ढूंढकर लायेंगे... या अंधकार को हटकर सत्य को सामने लायेंगे...!
    काला रंग अधिकार, समर्पण का प्रतीक है तथा काला रंग ईश्वर का भी प्रतिनिधित्व करता है... क्योंकि आम धारणा है कि ईश्वर का निवास अंतरिक्ष में है, और अंतरिक्ष का रंग काला ही है, इसी लिए काले रंग में ईश्वर का निवास है... ये भी एक कारण है, काला कोट पहनने का...!
     काला रंग समर्पण भी दर्शाता है, क्योंकि चर्च में पादरी ईशा मसीह के सामने खुद का समर्पण दर्शाने के लिए काले रंग के कपड़े पहनकर जाते हैं...! 

एडवोकेट एक्ट 1961 और Tne Regulation of Bar Council of India

    इस अधिनियम में वकीलों और जजों के ड्रेस कोड के विषय में चर्चा की गई है... Section 49 (1) (gg) इसमें प्रोविजन है कि वकील ब्लैक कोट, सफेद नेक बैंड के साथ, पेंट, पतलून या धोती भी पहन सकता है, जींस नहीं पहन सकता...! इसी प्रकार महिलाओं के लिए साड़ी के साथ ब्लैक कोट, सफेद नेक बैंड... साड़ी प्लेन कपड़े की होनी चाहिए... रंग बिरंगी या पैटर्न वाली साड़ी नहीं होनी चाहिए...! 
   काला रंग ताकत, अधिकार, ईश्वर और अंतरिक्ष और ब्रह्मांड का प्रतिनिधित्व करता है... यही कारण है जो वकीलों। का कोट काला होता है..! लेकिन सबसे महत्वपूर्ण ये है कि काले कोट और गले में सफेद टाई का ड्रेस कोड वकीलों के लिए अधिवक्ता अधिनियम 1961 में एक नियम के तहत जरूरी है... सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट वकीलों के लिए काला कोट पहन कर प्रैक्टिस करना अनिवार्य है, बाकी निचली अदालतों में काला कोट जरूरी नहीं है...!
    
      ये थी जानकारी वकीलों के कोट पर... अच्छी लगे तो, आगे शेयर करें.. सुझाव हो तो कमेंट करके जरूर बताएं...!

 

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