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धार्मिक भावनाएं आहत होने पर किस कानून के अनुसार केस फाइल करना चाहिए ?

 धार्मिक भावनाएं आहत होने पर किस कानून के अनुसार केस फाइल करना चाहिए ? 


       कुछ लोगों का काम होता है, किसी पर भी बिना मतलब के कीचड़ उछालना... किसी एक की गलती के लिए लाखों लोगों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ करना... गलती किसी की भी क्यों ना हो, परिवार और उसके धर्म और मान्यताओं को बीच में नहीं लाना चाहिए... कई लोग अपने निजी हित के लिए किसी भी धर्म या देवी देवताओं पर या उनके चरित्र पर बिना कुछ विचार किए कुछ भी बोल देते हैं... इस तरह की बातों से लाखों लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचती है... ये बहुत गलत है, इन्हें देश हित में रोका जाना चाहिए... आज इसी बिंदु पर ये ब्लॉग है...

 किसी की धार्मिक भावनाएं को चोट पहुंचाने पर क्या कानून है...?
   धर्म या मजहब या रिलीजन ये सब अलग अलग भाषाओं के शब्द है... इनका शाब्दिक अर्थ समान है...! कोई भी व्यक्ति किसी भी तरह से किसी की मान्यताओं का गलत अर्थ प्रस्तुत करता है, या गलत व्याख्या करता है, या देवी देवताओं को गाली देता है, उनके चरित्र पर झूठे लांछन लगाता है... या किसी के धर्म के विषय में अपशब्द कहता है... या किसी धर्म के प्रतीक चिन्हों को कोई नुकसान पहुंचाता है...  ये सब धार्मिक भावनाएं को आहत करने वाले होते हैं  ऐसे मामलों में क्या उपचार है और इनपर क्या कानून है... ये हम आगे जानेंगे...!

किसी धर्म का या उसकी बातों का प्रचार प्रसार, अपने धर्म में बताई गई मानव कल्याण की बातों का प्रचार करना... ये सब अच्छी बातें हैं... लेकिन किसी अन्य धर्म या उसको मानने वालों को गाली देना, उनके रहन सहन पर कोई अभद्र टिप्पणी करना, ये सब स्वीकार्य नहीं है, किसी धर्म या उसके प्रतीक चिन्हों से करोड़ों लोगों की भावनाएं जुड़ी होती है... धर्म और उसकी मान्यताएं पीढ़ी दर पीढ़ी आज हम तक पहुंची है, इनका कोई न कोई अर्थ जरूर है, बिना उसकी पूर्ण जानकारी के हम अपने मन से इनपर कोई टिक्का टिप्पणी नहीं कर सकते... बल्कि जानकारी होने पर भी हमें इनपर कोई अभद्र किसी को नहीं है... कोई भी धर्म बुरा नहीं होता, अपने धर्म के लिए सबके मन में सम्मान और गर्व की भावना होती है...! जब कोई किसी धर्म या उनके अनुयायियों पर बेवजह टिप्पणी करता है तो करोड़ों लोगों की भावनाएं आहत होती ही हैं... धीरे धीरे ये भावनाएं आक्रोश का रूप धारण करती है, जिसके परिणामस्वरूप टकराव की स्थिति पैदा होती है, ये आक्रोश बड़े उपद्रव का रूप धारण कर सकता है... जिससे देश के संसाधनों का नुकसान हो सकता है... देश का नुकसान ही हमारा नुकसान है... इस तरह के मामले आजकल इंटरनेट के विभिन्न प्लेटफार्म पर ज्यादा होते हैं... 
   सबसे पहले हमें उस साइट या अकाउंट की पहचान करनी चाहिए, पहचान के बाद संबंधित साइट या ऐप पर जाकर उस कंटेंट की रिपोर्ट अपनी पूरी बात रखते हुए करनी चाहिए... कोई भी सोशल मीडिया प्लेटफार्म किसी भी धर्म के विरुद्ध टिप्पणी करने की अनुमति नहीं देता है... रिपोर्ट किए जाने के बाद उसपर जांच होगी, जांच में बताई गई बातें सही पाई जाने पर उसपर संबंधित साइट या प्लेटफॉर्न उसपर कार्यवाही करेगा और उसे वहां से हटा देगा, और जरूरी होने पर उस अकाउंट को ही सस्पेंड कर देगा...इसके बाद हम कानून की मदद ले सकते हैं... भारत में इस तरह के मामलों पर पहले से ही कानून बने हुए हैं... जिनेक अंतर्गत बुराई करने वाले को पुलिस द्वारा गिरफ्तार करके उसके खिलाफ जांच की जाती है और दोषी पाए जाने पर अदालत द्वारा उसके लिए सजा तय की जाती है, जिसके भय से कोई और इस तरह की हरकत करने से बचे...!

धार्मिक भावनाएं आहत होने का कारण
      क्योंकि लोग अपने धर्म के प्रति जागरूक नहीं है, जिसका फायदा अन्य लोग अपने हिसाब से धर्म की व्याख्या करके या टिप्पणी करके उठाते हैं, धर्म में आस्था रखने वालों को अपने धर्म की उचित जानकारी होनी चाहिए, परंपरागत धार्मिक संस्थाओं को धर्म की व्याख्या आधुनिक काल के अनुसार करते रहना चाहिए... कुकुरमुत्ते की तरह उग आए नए नए धर्म गुरुओं को ज्यादा तवज्जो नहीं दी जानी चाहिए... ताकि समाज के धन और भावनाओं का अंधविश्वास के आधार पर दोहन नही किया जा सके... अपने धन को हमेशा शिक्षा और समाजोत्थान पर ही खर्च करना चाहिए... जब धर्म की व्याख्या आधुनिक काल के अनुसार तार्किक व्याख्या के आधार पर होती रहेगी तो कोई अन्य उसपर टिप्पणी नहीं कर सकता है... ना ही अपने धर्म पर किसी को टिप्पणी करने का अधिकार या छूट देनी चाहिए...! गलत बातों का विरोध हमेशा होना ही चाहिए...! लोग धर्म के प्रति जितने अधिक जागरूक होंगे, किसी को भी आपके धर्म पर टिप्पणी करने का मौका और हिम्मत नहीं होगी...! जागरूकता और ज्ञान ही सबसे बड़ी शक्ति है... इनका अर्जन करते रहना चाहिए...! यही सबसे बड़े हथियार है, जिसके पास ये दोनों होंगे, उसे आगे बढ़ने से कोई रोक नहीं सकता है...!
किसी के भी धर्म पर चाहे वो अपना हो या किसी और का... उसकी बुराई नहीं सुननी चाहिए, क्योंकि कोई भी धर्म उसके मानने वाले के लिए बुरा नहीं होता, धर्म के लिए उसे मानने वाले के मन में सम्मान और गर्व का भाव होता है, उसे ठेस पहुंचाने का अधिकार किसी को भी नहीं है... जब गलत बातों को बढ़ावा मिलेगा तो आगे जाकर सबके धर्म पर टिक्का टिप्पणी होनी ही है....! 

भारत का कानून
     भारत के संविधान में स्पष्ट कहा गया है कि कोई भी व्यक्ति किसी अन्य के धर्म का ना तो मजाक उड़ा सकता है और ना ही उस पर कोई गलत टिप्पणी कर सकता है... ना ही किसी के धर्म को बुरा कह सकता है... सेक्शन 295 के अंतर्गत ये प्रावधान है कि कोई भी व्यक्ति किसी भी धर्म के उपासना स्थल को ना तो नुकसान पहुंचा सकता है और ना ही उसे अपवित्र कर सकता है, ऐसा करना एक संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है, और गैर जमानती अपराध है, जिसमें कम से कम 2 साल की सजा या जुर्माना लगाया जा सकता है या दोनों लगाए जा सकते हैं...! 
 
IPC सेक्शन 298 के अंतर्गत प्रावधान है कि कोई भी व्यक्ति किसी भी धर्म की धार्मिक मान्यताओं के विरुद्ध कोई शब्द कहेगा या लिखेगा या कोई इशारा करेगा तो ये भी एक गैर जमानती अपराध है, जिसके लिए 1 साल की सजा या अदालत द्वारा तय किया गया जुर्माना लगाया जा सकता है या दोनों ही लगाए जा सकते हैं....!
  
     किसी भी धर्म या उसकी मान्यताओं या उस धर्म से संबंधित देवी देवताओं पर कोई अभद्र टिप्पणी नहीं करना चाहिए, क्योंकि आप किसी के धर्म पर टिप्पणी करेंगे या उसका समर्थन करेंगे तो, आगे जाकर कोई भी आपके धर्म पर भी टिप्पणी कर सकता, जो आप नहीं चाहेंगे...! 


   ये थी जानकारी... कैसी लगी... कमेंट करके बताइए जरूर...

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