सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

साइबर क्राइम यानी ऑनलाइन ठगी की कंप्लेन कैसे करें ?

साइबर क्राइम यानी ऑनलाइन ठगी की कंप्लेन कैसे करें ?


   पुराने समय में डकैत रात के समय में आते थे और सबकुछ चुराकर निकल जाते थे, मुंह पर कपड़ा बांधे ये डकैत गांव के गांव लूटकर जंगलों में भाग जाते थे, जिनको पकड़ने के लिए पुलिस भटकती रहती थी, लेकिन बहुत कम मामलों में पुलिस सफल हो पाती थी... ज्यादा पकड़ में नहीं आते थे तो उनपर इनाम रखा जाता था, ताकि कोई इनाम के लिए उन डकैतों की सूचना पुलिस को दे और उन्हें पकड़कर उनके किए की सजा दी जा सके... फिर देश आजाद हुआ और डकैतों ने नए तरीकों से लूटपाट करनी शुरू कर दी, यानी डकैत नेता बन गए और पुलिस को अपने नियंत्रण में ले लिया... फिर समय बदला और डकैत समाज ने पढ़ाई लिखाई शुरू की और आधुनिक तरीके से डकैती डालनी शुरू कर दी, आधुनिक डकैत अपने घर में बैठे बैठे ही डकैती करने लगे... ये डकैत इतने तेज हैं कि चाहें तो एक मिनट में कहीं भी बैठकर बैंक के बैंक लूट सकते हैं... कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता इनका... किसी का धन लूटना तो इनके लिए बाएं हाथ का खेल है... ये आधुनिक डकैत अपने काम को अंजाम अपने मोबाइल या कंप्यूटर से देते हैं... और किसी को कानों कान पता नहीं चल पाता... इनको पकड़ने के लिए पुलिस को भी नए तरीके अपनाने पड़ते हैं..  आजकल ये लोग किसी के भी साथ लूटपाट कर सकते हैं... ऐसी स्थिति में हमें पुलिस के पास जाना पड़ता है या कोर्ट की शरण में जाना पड़ता है... जबकि हमारी शिकायत घर बैठे बैठे ही हो सकती है... यानी हमें पुलिस के पास जाने की जरूरत नहीं है... 
     हम अपने साथ हुई साइबर ठगी या किसी भी तरह का हमारा कोई ऑनलाइन नुकसान होने पर किस तरह पुलिस की मदद ले सकते हैं... आज इस ब्लॉग में समझेंगे...!

साइबर क्राइम
     इंटरनेट के माध्यम से किया गया अपराध साइबर क्राइम कहलाता है, साइबर क्राइम के मामलों में भारतीय दण्ड संहिता की धाराओं के साथ साथ सूचना और तकनीकी एक्ट के अंतर्गत केस दर्ज होता है, कोई किसी को सोशल मीडिया या मोबाइल या इंटरनेट के माध्यम से धमकी या उसके साथ कोई ठगी या किसी का कोई फोटो वीडियो गलत उद्देश्य से उपयोग में लेता है तो..  ऐसे मामले में IPC के सेक्शन 506 के अलावा उसपर सूचना और तकनीकी अधिनियम की धारा में केस दर्ज करवाया जा सकता है...!
साइबर क्राइम के मामलों में पुलिस के पास जाने की जरूरत नहीं होती, ऐसे मामलों में इंटरनेट के माध्यम से भी केस दर्ज करवाया जा सकता है... 
साइबर क्राइम की रिपोर्ट दर्ज करवाने के लिए हमें www.cybercrime.gov.in पर जाना चाहिए... इस साइट पर जाने के बाद साइबर क्राइम का पोर्टल खुलेगा, जहां हम अपने साथ हुए साइबर अपराध की रिपोर्ट दर्ज करवा सकते हैं, इस साइट पर जाने के बाद एक मीडिया गैलरी खुलती है, जिसमें विभिन्न ऑडियो के माध्यम से, अलग अलग मामलों की जानकारी हम ले सकते हैं... इन ऑडियो से हमें जरूरी जानकारी मिल जाती है, जिनकी सहायता से हम अपना केस फाइल कर सकते हैं...! 
साइबर क्राइन में सोशल साइट्स पर पहचान की चोरी, किसी ऑडियो, वीडियो या फोटो से मानहानि या उनका दुरुपयोग पर हम साइबर क्राइम सेल से न्याय की मांग कर सकते हैं... मोबाइल या सोशल साइट्स पर किसी ने धमकी दी है, या बैंक अकाउंट को हैक करके उसमें रखी रकम उड़ा दी है, या किसी भी तरह से नुकसान किया गया है तो इस साइट पर पूरी जानकारी के साथ रिपोर्ट दी जा सकती है... 
इस साइट पर शिकायत दर्ज करवाने के बाद एक शपथ पत्र पर साइन करने होते हैं, जो डिजिटल होता है... इस शपथ पत्र में हमें अपने साथ हुए क्राइम की पूर्ण जानकारी के साथ अलग अलग विवरण और उसके सबूत पेश करने होते हैं... और जिसके बाद सबमिट कर देना होता है, सबमिट होने के बाद आपकी शिकायत पर पूर्ण कार्यवाही होगी और उसक रिजल्ट भी साइबर क्राइम सेल देगी...!
इस साइट पर किसी गंभीर मामले में अपनी पहचान छिपाकर भी शिकायत दर्ज करवाई जा सकती है, जैसे किसी महिला या किसी बच्चे के साथ हो रहे साइबर क्राइम की शिकायत या बहुत ही गंभीर मामले की शिकायत भी अपनी पहचान छिपाकर की जा सकती है. 
इस साइट पर अपने वेरिफिकेशन के लिए अपना नाम, पता, मेल आईडी, मोबाइल नंबर और अपनी आईडी का प्रूफ डालना होता है... मोबाइल पर एक ओटीपी भेजकर पहचान को कन्फर्म किया जाता है... फिर शिकायत दर्ज करके उसकी एक पीडीएफ फाइल आगे के रिकॉर्ड के लिए रख लेनी चाहिए या उसका प्रिंट निकाल कर रख लेना चाहिए... ताकि आगे कोर्ट में पेश करते समय कोई परेशानी नहीं हो...! 

इस साइट पर अपने साथ हुए अपराध का विवरण जैसे ठगी कहां और किस मध्यम से हुई, किस प्रकार का क्राइम हुआ जहां भी क्राइम हुआ है, इस साइट का यूआरएल, स्क्रीन शॉट आदि जितने भी सबूत अपने पास हो, यहां अपलोड करने चाहिए... ताकि केस मजबूत हो और उसपर तुरंत कार्यवाही हो... अगर अपने पास उस ठगी कर्ता के कोई मोबाइल नंबर, मेल आईडी, या किसी सोशल मीडिया अकाउंट का पता या उसका कोई फोटो आदि हो तो उसे सबूत के रूप में साइट पर अपनी शिकायत के साथ अपलोड करना चाहिए...! 
इन सबके बाद अपनी शिकायत अंतिम रूप से सबमिट कर देनी चाहिए और उसकी पीडीएफ फाइल अपने पास रख लेनी चाहिए...!

इस पोर्टल पर दर्ज की गई शिकायत पर शत प्रतिशत कार्यवाही होती है, और उसका रिजल्ट भी निकलता है... और किसी भी साइबर क्राइम के मामले की शिकायत दर्ज करवाई जा सकती है...!



ये थी जानकारी साइबर क्राइम होने के बाद किस प्रकार शिकायत दर्ज करवाई जानी चाहिए... उस पर... आपको कैसी लगी... कमेंट करके बताइए...!

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

पॉवर ऑफ अटॉर्नी

 पॉवर ऑफ अटॉर्नी       कई बार हमें कुछ कामों की जरूरत पड़ती है और हम उन्हें कर पाने में सक्षम नहीं होते या अपना काम छोड़कर वह काम करना नहीं चाहते... या हम बीमार होते हैं और हमारे काम रुक जाते हैं तो... ऐसी स्थिति में हम अपने आप को असहाय महसूस करते हैं... ऐसा ही मामलों में काम आती है पावर ऑफ अटॉर्नी...  पावर ऑफ अटॉर्नी होती क्या है...? पावर ऑफ अटॉर्नी एक्ट 1882 के अनुसार एक ऐसा दस्तावेज होता है, जिसके जरिए कोई व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति को अपना लीगल प्रतिनिधि नियुक्त करता है...!  जो घोषित करता है वो प्रिंसिपल कहलाता है और जो जिसको घोषित किया जाता है उसे एजेंट कहा जाता है...! एजेंट प्रिंसिपल के स्थान पर ज्यूडिशियल, फाइनेंशियल और अन्य फैसले ले सकता है... प्रिंसिपल के स्थान पर कोई डीड आदि साइन कर सकता है... ये सब कानूनन वैध होते हैं...! एजेंट पावर ऑफ अटॉर्नी के दायरे से बाहर नहीं जा सकता, यानी किसी मामले में मनमानी नहीं कर सकता... अगर एजेंट की वजह से प्रिंसिपल को कोई नुकसान हो जाता है तो उसकी भरपाई एजेंट ही करेगा, ये भी प्रावधान है...!  पावर ऑफ अटॉर्नी कैसे...

किरायेदार से अपनी दुकान या अपना मकान कैसे खाली करवा सकते हैं...?

किरायेदार से अपनी दुकान या अपना मकान कैसे खाली करवा सकते हैं...?        एक परिवार या व्यक्ति के लिए आजीविका जीवन का आधार होती है... आजीविका का अर्थ है... आय का श्रोत, जहां से आपके घर में धन आता है, जिससे आप अपने परिवार का भरण पोषण करते हैं... ये सरकारी नौकरी या खुद का व्यवसाय हो सकता है... कोई बेरोजगार होता है या आजीविका का स्थाई साधन नहीं होता, ऐसी स्थिति में धन की आवश्यकता रहती है, लेकिन आजीविका स्थाई नहीं होती... तब हमारे पास अपनी संपति होती है... जिसे या तो हम बेच सकते हैं या फिर उसे रेंट यानी किराए पर दे सकते हैं... किराए पर देने का विकल्प सबसे बेहतर होता है... इसमें किसी जरूरतमंद को रहने के लिए घर मिल सकता है या आपके पास कोई दुकान है तो अपनी दुकान चला सकता है... उसकी रहने या व्यवसाय की आवश्यकता पूरी हो जाती है, और उसके माध्यम से आपको धन  की...  लेकिन कई बार ऐसा होता है कि हम अपना घर या दुकान विश्वास करके किराए पर दे तो देते हैं लेकिन उस संपति को हमारे जरूरत पड़ने पर किरायेदार खाली करनें से मना कर देता है... या फिर दुर्व्यवहार करने पर उतारू हो जाता है....

कोरोना से सूंघने की शक्ति जाने के बाद वापस कैसे लाया जा सकता है...?

  COVID-19 होने पर  सूंघने की शक्ति जाने के बाद, उसे वापस कैसे लाया जा सकता है...?  कोविड नाईनटीन या कोरोना, मानव इतिहास के पूरे दो वर्ष खा चुका है... 2020 और 2021... एक आम धारणा है कि ये बीमारी चीन ने विकसित की और बाकी दुनिया पर डिप्लॉय कर दी... इस धारणा को इससे भी बल मिलता है कि जब बाकी दुनियां में कोरोना तांडव मचा रहा है और चीन अपनी सरपट दौड़ती जिंदगी जी रहा है, जैसे कुछ हुआ ही नहीं है... ना चीन ने कोई वैक्सीन बनाने की घोषणा की, ना बीमारी से छुटकारा पाने की... फिर कैसे ये महामारी चीन में बेअसर हो गई है...? इस सवाल पर सब चुपी साधे हुए हैं...  द वीकेंड ऑस्ट्रेलियन की चीन से प्राप्त एक गुप्त दस्तावेज के हवाले से छापी गई रिपोर्ट के अनुसार चीन ये वायरस तीसरे विश्व युद्ध को ध्यान में रखते हुए विकसित कर रहा था... इस वायरस का आधार 2015 में आया सारस वायरस है, इस रिपोर्ट में ये भी दावा किया गया है कि चीन ने ये वायरस एक हथियार के तौर पर इस्तेमाल करने के लिए विकसित किया था... लेकिन गलती से ये वायरस समय से पहले ही प्रयोगशाला से बाहर आ गया... और इसका पता चल गया, वरना तबाही का म...